इस वेद का संकलन में महर्षि कृष्ण द्वैपायन व्यास जी के द्वारा हुआ था।

यह वह वेद है जिसने हमें अनेक प्रकार के चिकित्सा पद्धतियों का उपहार दिया यही वह वेद है जिसके कारण हम आज आयुर्वेद को मानते हैं, आयुर्वेद में विश्वास करते हैं।

इस वेद में ब्रह्म की पूजा करने के लिए या उपासना करने के लिए बहुत सारे मंत्र दिए गए हैं यह वह वेद है जो गृहस्थ नियमों के पालन करने का तरीका कर्तव्य और मर्यादा है बतलाता है अर्थात पति पत्नी को किस नियमों का पालन करना चाहिए किस मर्यादा में रहना चाहिए और उनके कर्तव्य क्या क्या है यह भी वर्णन इस वेद में मिलता है।

सामान्य तौर पर इसमें लगभग 6000 मंत्रों के होने का वर्णन मिलता है लेकिन किसी किसी में कम हो सकते हैं।

अथर्व वेद की भाषा और स्वरूप प्रारूप को देखकर ऐसा माना जा सकता है कि इस वेद की रचना सबसे बाद में हुई लेकिन संसार में चारों ही वेदों का अपना बहुत ही महत्वपूर्ण योगदान और महत्व है।

अगर आप किसी और पुराण या वेद या ग्रंथ को चाहते हैं तू हमें कमेंट कर सकते हैं हम उसे भी अपलोड कर देंगे पीडीएफ रूप में।

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