ब्रह्मचर्य पालन न करने के नुकसान:

नमस्कार दोस्तों, पहले हमने जाना था कि ब्रह्मचर्य क्या है, फिर आपने जाना की ब्रह्मचर्य के पहले चरण अर्थात् वीर्य संरक्षण के क्या और कितने लाभ होते हैं।

आज के इस आर्टिकल में हम जानेंगे कि इसके पालन न करने के क्या क्या नुकसान हैं।

आज के समय में अगर आप किसी भी डॉक्टर जो एलोपैथिक हो, उनसे जब आप ब्रह्मचर्य के बारे में पूछेंगे तो वो यही बोलेंगे कि ये तो साधारण है, और उम्र के साथ ऐसा होना स्वाभाविक है, और सप्ताह में एक या दो बार मैथुन करने से कोई हानि नहीं होगी बल्कि शरीर और दिमाग बेहतर होगा।
अब आप ही बताइए कि अगर आपकी गाड़ी में से हर हफ्ते कोई थोड़ा थोड़ा तेल निकलता रहे तो क्या कुछ दिनों बाद गाड़ी चलने लायक रह जाएगी?
वो तो मशीन है, तब बेकार हो जाता है, और ये तो जीवन को जीने के लिए सबसे महत्वपूर्ण गाड़ी है, तो इसका तेल निकालने पर कैसे उम्मीद करते हो कि जीवन को पूरा जी लोगे?
सीधा सा अर्थ यह है की इसका पालन न करने से ही मनुष्य अपनी आयु को आधा कर लेता है।




आइए जानते हैं इसके पालन न करने पर दिनचर्या में और जीवन जीने के तरीके में होने वाले नुकसान:

* ब्रह्मचर्य पालन न करने वाला व्यक्ति हर वक्त थका हुआ सा रहेगा, आलस्य तथा प्रमाद ग्रस्त होगा, हर कार्य को कल पर डालने वाला होगा।

अब आप ही बताइए की ऐसा इंसान क्या कभी भी अपने जीवन में सफल हो पाएगा जिसकी कार्य क्षमता ही कम या नष्ट हो चुकी हो, यानी की कही न कहीं ब्रह्मचर्य का सीधा संबंध हमारे जीवन की सफलता से जुड़ा हुआ है। यदि ब्रह्मचर्य नहीं तो सफलता भी नहीं।

* इसका पालन न करने वाले व्यक्ति में हमेशा आत्म विश्वास का अभाव रहेगा, वो जिस कार्य को कर सकता है उसे लेकर भी संशय में रहेगा कि पता नहीं मैं ये कर भी पाऊंगा या नहीं।
अब आप ही बताइए कि जब व्यक्ति हर वक्त संशय में रहेगा तो क्या ये संभव है की वो कार्य कर पाएगा, नहीं ना.... तो इसका सीधा संबंध हमारे कार्य संपूर्ण होने से भी संबंधित है।

* इसका पालन न करने वाले में हमेशा कहीं न कहीं एक हीन भावना रहेगी, मतलब चाहे वो कितना ही सही क्यों न हो लेकिन खुद को कम ही आंकता रहेगा, अब आप ही बताइए, जो खुद को ही कम मानेगा, उसका सही मूल्यांकन कोई और कैसे सही कर सकता है, यानी इसका संबंध हमारे सम्मान से भी है।
ब्रह्मचर्य नहीं तो स्वयं का मान भी नहीं।

* इसका पालन न करने पर शरीर के अंदर विभिन्न रोगों का डेरा बन जाता है, जो औषधि से भी ठीक नहीं हो पाते। मनुष्य हर वक्त किसी न किसी समस्या की दवा ही खाता रहता है। उसे साधारण रोग भी जल्दी ही पकड़ लेते हैं, क्युकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो चुकी होती है।
अर्थात् इसका सीधा संबंध हमारे निरोगी होने से भी है।

* कुछ समस्याएं जो विवाह के बाद सामने आती हैं, जैसे संतान उत्पत्ति में समस्या, नपुंसकता के लक्षण, और भी अनेक समस्या जिनके बारे में यहां नहीं लिखा जा सकता।


आशा है आप समझे होंगे कि इसके पालन न करने के नुकसान क्या हैं।

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